Short & Long Holi Essay in Hindi : होली पर निबंध [500 Words]

Short & Long Holi Essay in Hindi : होली पर निबंध [500 Words]:- भारत एक धार्मिक देश है, जहाँ पर अनेक धर्मों और समुदायों के लोग निवास करते है।

लेकिन, हिन्दू धर्म के लोगों की यहाँ पर अधिकता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष में बहुत से त्योंहार आते है। इन्हीं त्यौहारों में से एक त्योंहार है, जिसका नाम है:- होली।

होली एक धार्मिक त्योंहार है। इस त्योहार को सम्पूर्ण भारत में बड़े धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

होली के त्योहार को “रंगों के उत्सव” के नाम से भी जाना जाता है। इस आर्टिकल में हम आपको होली पर निबंध के बारे में बताएंगे।

होली का पर्व वैसे तो सम्पूर्ण विश्व में बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। लेकिन भारत देश में इस पर्व की बहुत ही ज्यादा मान्यता है।

यह पर्व हिन्दू धर्म के सबसे पुराने पर्वों में से एक है। होली के त्योंहार को एक सप्ताह पहले से ही लोग मनाने लग जाते है।

होली का पर्व “रंगों” का पर्व है। इस दिन लोग एक दूसरे को रँग-गुलाल लगते है। इस दिन वह एक दूसरे से गले मिलते है।

होली के दिन होलिका दहन भी की जाती है। आपको इस आर्टिकल में होली के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलेगा। तो चलिए दोस्तों, शुरू करते है:- Holi Essay in Hindi

Short & Long Holi Essay in Hindi : होली पर निबंध [500 Words]

Short & Long Holi Essay in Hindi : होली पर निबंध [500 Words]
Short & Long Holi Essay in Hindi : होली पर निबंध [500 Words]

परिचय

अपना घर चलाने के लिए जो पेशेवर घरों से दूर रहते हैं, वह भी होली के समय पर अपने परिवार के पास लौट आते हैं।

यह त्योहार हमें हमारे संस्कृति से जोड़ने का कार्य करता है, अतः इस दृष्टी से यह हमारे लिए बहुत अधिक महत्वपूर्ण है।

होली का इतिहास व मनाए जाने का कारण

पुराणों के अनुसार, विष्णु भक्त प्रह्लाद से क्रोधित होकर प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप ने, पुत्र प्रह्लाद को ब्रह्मा द्वारा वरदान में प्राप्त वस्त्र धारण किए बहन होलिका के गोद में आग से जला देने की मनसा से बैठा दिया।

किन्तु प्रभु की महिमा से वह वस्त्र प्रह्लाद को ढ़क लेता है और होलिका जल कर भस्म हो जाती है। इस खुशी में नगरवासियों द्वारा दूसरे दिन होली मनाया गया। तब से होलिका दहन और होली मनाया जाने लगा।

होली का महत्व

होली के पर्व से जुड़े होलिका दहन के दिन, परिवार के सभी सदस्य को उबटन (हल्दी, सरसों व दही का लेप) लगाया जाता है।

ऐसी मान्यता है की उस दिन उबटन लगाने से व्यक्ति के सभी रोग दूर हो जाते हैं व गांव के सभी घरों से एक-एक लकड़ी होलिका में जलाने के लिए दी जाती है।

आग में लकड़ी जलने के साथ लोगों के सभी विकार भी जल कर नष्ट हो जाते हैं। होली के कोलाहल (शोर) में, शत्रु के भी गले से लग जाने पर सभी अपना बड़ा दिल कर के आपसी रंजिश भूल जाते हैं।

भारत के विभिन्न राज्यों की होली

  • ब्रजभूमि की लठमार होली

सब जग होरी या ब्रज होरा” अर्थात सारे जग से अनूठी ब्रज की होली है। ब्रज के गांव बरसाना में होली प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

इस होली में नंदगांव के पुरुष और बरसाना की महिलाएं भाग लेती हैं। क्योंकि श्री कृष्ण नंदगांव से थे और राधा बरसाना से।

जहां पुरुषों का ध्यान भरी पिचकारी से महिलाओं को भिगोने में रहता है। वहीं महिलाएं खुद का बचाव और उनके रंगों का उत्तर उन्हें लाठियों से मार कर देती है। सच में यह अद्भुत दृश्य होता है।

  • मथुरा और वृंदावन की होली

मथुरा और वृंदावन में होली की अलग छटा नज़र आती है। यहां होली की धूम 16 दिन तक छाई रहती है।

लोग “फाग खेलन आए नंद किशोर” और “उड़त गुलाल लाल भए बदरा” आदि अन्य लोक गीत का गायन कर इस पावन पर्व में डूब जाते हैं।

  • महाराष्ट्र और गुजरात की मटकी फोड़ होली

महाराष्ट्र और गुजरात में होली पर श्री कृष्ण की बाल लीला का स्मरण करते हुए होली का पर्व मनाया जाता है।

महिलाएं मक्खन से भरी मटकी को ऊँचाई पर टांगती हैं इन्हें पुरुष फोड़ने का प्रयास करते हैं और नांच गाने के साथ होली खेलते हैं।

  • पंजाब का “होला मोहल्ला”

पंजाब में होली का यह पर्व पुरुषों के शक्ति के रूप में देखा जाता है। होली के दूसरे दिन से सिक्खों के पवित्र धर्मस्थान “आनंदपुर साहेब” में छः दिवसीय मेला लगता है। इस मेले में पुरुष भाग लेते हैं तथा घोड़े सवारी, तीरंदाजी जैसे करतब दिखाते हैं।

  • बंगाल की “डोल पूर्णिमा” होली

बंगाल और उड़ीसा में डोल पूर्णिमा के नाम से होली प्रचलित है। इस दिन पर राधा कृष्ण की प्रतिमा को डोल में बैठा कर पूरे गांव में भजन कीर्तन करते हुए यात्रा निकाली जाती है और रंगों से होली खेली जाती है।

  • मणिपुर की होली

होली पर मणिपुर में “थबल चैंगबा” नृत्य का आयोजन किया जाता है। यहां यह पर्व पूरे छः दिवस तक नाच-गाने व अनेक तरह के प्रतियोगिता के साथ चलता रहता है।

निष्कर्ष

फाल्गुन की पूर्णिमा से उड़ते गुलाल व ढोलक की ताल से शुरू हुई होली भारत के कोने- कोने में विभिन्न प्रकार से हर्षोंल्लास के साथ मनाई जाती है।

इस पर्व के आनंद में सभी आपसी मन-मुटाव को भूल कर एक-दूसरे के गले लग जाते हैं।

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निष्कर्ष

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