Makar Sankranti Essay in Hindi : मकर संक्रांति पर निबंध

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हम आशा करते है कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया मकर संक्रांति पर निबंध जरुर पसंद आएगा। अंत में आपसे एक अनुमति है कि आप इस मकर संक्रांति पर निबंध के लेख को शुरुआत से अंत तक अवश्य पढ़े। तो चलिए शुरू करते है:- Makar Sankranti Essay in Hindi 100 Words

मकर संक्रांति पर निबंध 100 शब्दों में : Short Essay on Makar Sankranti in Hindi 100 Words

Makar Sankranti Gift Card Images 2021
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मकर संक्रांति हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। इसे सम्पूर्ण भारत देश में बड़े ही हर्ष-उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

मकर संक्रांति का यह पावन पर्व प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है। मकर संक्रांति सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने को कहते है।

मकर संक्रांति के पर्व को दान-पुण्य का पर्व भी माना जाता है। इस दिन सभी लोग सुबह जल्दी ही स्नान करके दान-पुण्य करते है।

इस दिन सभी घरों में तिल और गुड़ के लड्डू बनाये जाते है। इसके साथ-साथ लोग इस दिन पतंगबाजी भी करते है।

दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को एक अन्य नाम से भी जाना जाता है, जिसे पोंगल कहा जाता है। इसके अतिरिक्त पंजाब और हरियाणा में मकर संक्रांति को माघी के नाम से जाना जाता है।

वहाँ पर इस समय नई फसल के आगमन पर फसल का स्वागत किया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस दिन लोहड़ी पर्व मनाया जाता है।

मकर संक्रांति पर निबंध 200 शब्दों में : Short Essay on Makar Sankranti in Hindi 200 Words

Makar Sankranti 2021 Images for WhatsApp
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मकर संक्रांति का त्यौहार हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा बड़े ही हर्ष, उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

यह पर्व हर वर्ष 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है, लेकिन इसे 15 जनवरी दिन सौर चक्र के आधार पर भी मनाया जाता है।

लोग इस त्यौहार को सुबह पवित्र गंगा नदी में स्नान करके मनाते हैं तथा सूर्य भगवान की पूजा भी करते हैं। सूर्य को हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान माना जाता है।

ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा नदी में स्नान करने से हमारे सभी पाप धुल जाते हैं और मृत्यु के पश्चात् हमें मोक्ष की प्राप्त होती है।

मकर संक्रांति के पर्व पर लोग तिल और गुड़ के लड्डू बनाते है और उन्हें खाकर मकर संक्रांति के उत्सव का आनंद प्राप्त करते हैं।

लोग, विशेष रूप से बच्चे, अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ पतंगबाजी भी करते है और इस अवसर का आनंद प्राप्त करते हैं।

मकर संक्रांति के पावन पर्व को दान-पुण्य का पर्व माना जाता है और इस दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपने श्रृंगार की वस्तुओं का दान करती है।

इन सबके पीछे ऐसी मान्यता कि मकर संक्रांति के दिन श्रृंगार की वस्तुओं का दान करने से उनके सुहाग की आयु लम्बी होती है।

मकर संक्रांति का पर्व आनंद, खुशी और लोगों के आपसी मेल-जोल का पर्व है। मकर संक्रांति के त्यौहार का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच भाईचारे की भावना को बढ़ाना है।

मकर संक्रांति पर निबंध 300 शब्दों में : Long Essay on Makar Sankranti in Hindi 300 Words

Happy Makar Sankranti 2021 Images in English
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प्रस्तावना:- भारत देश के प्रमुख त्योहारों में से एक प्रमुख त्यौहार मकर संक्रांति है। मकर संक्रांति के इस त्यौहार की सबसे खास बात यह है कि प्रत्येक वर्ष इस त्यौहार की एक निश्चित तारीख तय रहती है और वह तारीख 14 जनवरी है।

मकर संक्रांति के इस त्योहार की सबसे बड़ी मान्यता मीठा खाना तथा मीठा बोलना है।मकर संक्रांति के इस पावन त्यौहार को बड़े ही हर्ष-उल्लास तथा ख़ुशी के साथ सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है।

मकर संक्रांति का त्योंहार कब मनाया जाता है?:- मकर संक्रांति का पावन पर्व सूर्य के उत्तरायण होने पर मनाया जाता है। जिस समय सूर्य उत्तरायण होकर मकर रेखा से गुजरता है। ऐसी स्थति में मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता हैं।

मकर संक्रांति का पर्व वैसे तो 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है। लेकिन कई लोग इस पर्व को एक दिन पहले तथा एक दिन बाद में अर्थात 14 जनवरी की जगह 13 जनवरी और 15 जनवरी के दिन भी मनाया जाता है।

आमतौर पर ऐसा कम ही होता है, क्योंकि मकर संक्रांति का संबंध पृथ्वी के भूगोल ओर सूर्य की स्थिति पर निर्भर करता है।

जब भी सूर्य मकर रेखा पर आता है, तो वह दिन मकर संक्रांति का दिन होता है। उस दिन 14 जनवरी का दिन होता है। अतः वह दिन मकर संक्रांति का होता है।

ज्योतिषियों के अनुसार मकर संक्रांति का त्योंहार कब मनाया जाता है?:- ज्योतिष विद्या के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य, धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और सूर्य के उत्तरायण की गति प्रारंभ करता है।

हिन्दू धर्म मे प्रत्येक त्योंहार को मनाने की जो तारीख निहित होती है, वह ज्योतिष द्वारा हमारी भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

ज्योतिषी इसे सही तारीख और ज्ञान के साथ त्योंहारों की तारीख को अपनी ज्योतिष विद्या के अनुसार निश्चित करते है और यह पूर्णतया सही तिथि और तारीख होती है।

मकर संक्रांति के अन्य नाम क्या-क्या है?:- भारत देश में बहुत से राज्य है और प्रत्येक राज्यों में उनकी अपनी-अपनी प्रांतीय भाषा होती है।

अपनी भाषा के अनुसार सभी लोग त्योंहारों को अलग-अलग नाम से बोलते है। त्योंहारो का नाम भले ही स्थानों के अनुसार अलग होता है, लेकिन त्योंहारों के मनाने का कारण सभी स्थानों पर एक ही होता है।

उदाहरण के तौर पर, आंध्रप्रदेश, केरल, और कर्नाटक में मकर संक्रांति के त्योंहार को संक्रांति कहा जाता है। जबकि, तमिलनाडु में मकर संक्रांति के पर्व को पोंगल पर्व के नाम से जाना जाता है।

इसके अतरिक्त पंजाब और हरियाणा में मकर संक्रांति के पर्व को लोहड़ी के नाम से जाना जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस दिन नई फसल के आगमन पर उसका स्वागत करने के लिए मनाया जाता है।

आसाम में मकर संक्रांति के पर्व को बिहू के रूप में मनाया जाता है। इसी प्रकार हर प्रान्त में इसका नाम और मनाने की तारीख भले ही अलग हो, लेकिन इस पर्व को मनाने की ख़ुशियाँ और मान्यता दोनों ही एक है।

मकर संक्रांति के त्योंहार के दिन क्या-क्या पकवान बनाए जाते है?: मकर संक्रांति के पर्व पर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के पकवान बनाए जाते है।

तिल और गुड़ के लड्डू इस मकर संक्रांति के त्योंहार की प्रमुख पहचान है। इस दिन दाल और चावल की खिचड़ी भी इस पर्व की प्रमुख पहचान है।

प्रमुख रूप से दाल और चावल की खिचड़ी को गुड़ घी के साथ खाने का महत्व है। मकर संक्रांति के पर्व के दिन सुबह जल्दी उठकर सभी लोग तिल का उबटन कर स्नान करते है।

मकर संक्रांति के इस पावन पर्व पर सुहागन/विवाहित महिलायें सुहाग की सामग्री का दान भी करती है।

इसके पीछे की मान्यता यह है कि सुहागन/विवाहित महिलाओं के अपने श्रृंगार की वस्तुओं के दान करने से उनके सुहाग अर्थात पति की आयु लम्बी होती है।

मकर संक्रांति के पर्व पर कौन-कौनसी सामग्रियों का दान किया जाता है?:- मकर संक्रांति के पावन पर्व को स्नान और दान का पर्व भी माना जाता है।

इस दिन सभी लोग तीर्थों एवं पवित्र नदियों में स्नान करते है। इसके साथ ही तिल, गुड़, चावल की खिचड़ी, फल, और धनराशि दान करने पर भी पुण्य की प्राप्ति होती है।

ऐसा भी माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन दान देने से सूर्य देवता प्रसन्न होते है। इसलिए इस दिन दान देने की परंपरा है।

मकर संक्रांति के दिन पतंगबाज़ी का महत्त्व:- मकर संक्रांति का त्योंहार बड़े ही हर्ष-उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

दान-पुण्य की सभी मान्यताओं के अलावा मकर संक्रांति के दिन पतंगबाज़ी का भी बड़ा महत्व है। इस दिन पतंगबाजी का विशेष महत्व है।

इस दिन लोग आनंद और उत्साह के साथ पतंगबाज़ी करते है। अनेक स्थानों पर तो पतंगबाज़ी का आयोजन बहुत बड़े पैमाने पर होता है जिसमें छोटे से लेकर बड़े सभी लोग ख़ुशी-ख़ुशी हिस्सा लेते है।

उपसंहार:- इस प्रकार मकर संक्रांति के दिन पूजा पाठ का भी महत्व होता है। इसके साथ ही मकर संक्रांति का दिन स्नान और दान प्रदान करके पुण्य कमाने का दिन भी होता है।

इस दिन तिल, गुड़ खाकर मीठा बोलने का भी महत्व है। इसलिए मकर संक्रांति के दिन पूजा-पाठ, दान, स्नान और पतंगबाज़ी का महत्व है। इसीलिए ऐसा कहा भी जाता है कि मीठा खाइए और मीठा बोलिए।

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